हंपबैक व्हेल बहुत ही सौम्य और निरापद जीव हैं. समुद्र की गहराइयों में विचरने वाले ये भीमकाय जीव सदा रहस्य के आवरण में घिरे रहे हैं. मानव के साथ इनका संपर्क तभी होता है जब जापान जैसे देश इनका शिकार करने के लिए समुद्र में जाते हैं. पहली बार इनके एक अनछुए पहलू के बारे में कुछ दुर्लभ तस्वीरें और ध्वनियां प्राप्त हुई हैं. गहरे शांत समुद्र में जलविहार करती हंपबैक व्हेल के एक झ़ुंड का आपसी संवाद या फिर मस्ती में गाया जा रहा कोई गीत... न जाने यह क्या है. आप भी सुनिए और आनंद लीजिए.
मंगलवार, 15 जनवरी 2008
मंगलवार, 8 जनवरी 2008
काश कि यह बब्बर शेर सफल हो पाता
वन्य जीवों की हत्या करने का दुष्कर्म पूरी दुनिया में चल रहा है. लेकिन एक बब्बर शेर के असफल शिकार का यह दुर्लभ वीडियो बताता है कि अब शिकारी भी शिकार बनेंगे. वन्य जीवों ने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार का विरोध शुरू कर दिया है. काश कि यह बब्बर शेर सफल हो जाता... कम से कम शिकारियों का थोड़ी नसीहत तो मिल पाती.
शरीर की गर्मी से होगा पानी गरम
ऊर्जा का संचार दुनिया के हर प्राणी में होता है, लेकिन इसके सही उपयोग की दिशा में अब तक कोई काम नहीं किया गया. अब मानव शरीर की ऊर्जा का उपयोग पानी गरम करने में किया जाएगा. स्टॉकहोम के सेंट्रल स्टेशन में रोजाना हजारों लोग आते हैं और इस दौरान उनके शरीर से निकली ऊर्जा बेकार चली जाती है.
इस बारे में प्रोजेक्ट लीडर कार्ल सनडॉम का कहना है कि इस ऊर्जा का इस्तेमाल पानी गर्म करने में किया जाएगा और उसे पास वाली बिल्डिंग में सप्लाई किया जाएगा. स्वीडन की सरकारी कंपनी जेनहूसेट के कार्ल ने बताया कि इस स्टेशन से रोजाना करीब ढाई लाख लोग गुजरते हैं. इनमें से कुछ ट्रेन पक़ड़ने तो कुछ सब-वे का इस्तेमाल करने, जबकि कुछ यहाँ शॉपिंग करने आते हैं. इन सभी लोगों के शरीर से ऊर्जा निकलती है और बेकार चली जाती है.
उन्होंने बताया कि इसी वजह से हमने इस ऊर्जा को वेंटिलेशन सिस्टम के जरिए इकट्ठा करने की योजना बनाई है. वैसे इस ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए आमतौर पर खिड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है.कार्ल ने कहा कि योजना यह है कि इस ऊर्जा का उपयोग पानी गर्म करने में किया जाए और उसे पास वाली एक बिल्डिंग में सप्लाई किया जाए. उन्होंने कहा कि 2010 में यहाँ बनकर तैयार होने वाले होटल और कुछ दुकानों को भी गर्म पानी की सप्लाई की जाएगी.
कार्ल के अनुसार यह पुरानी तकनीक है, लेकिन हम इसका इस्तेमाल नए तरीके से कर रहे हैं. फिलहाल कोई भी इस तकनीक के जरिए इस ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि इससे पानी गर्म करने की लागत में 20 फीसदी तक की कमी आएगी. ऊर्जा सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अपव्यय को लेकर सारी दुनिया में जो कुछ चल रहा है उसे देखते हुए यह एक सराहनीय प्रयास है.
इस बारे में प्रोजेक्ट लीडर कार्ल सनडॉम का कहना है कि इस ऊर्जा का इस्तेमाल पानी गर्म करने में किया जाएगा और उसे पास वाली बिल्डिंग में सप्लाई किया जाएगा. स्वीडन की सरकारी कंपनी जेनहूसेट के कार्ल ने बताया कि इस स्टेशन से रोजाना करीब ढाई लाख लोग गुजरते हैं. इनमें से कुछ ट्रेन पक़ड़ने तो कुछ सब-वे का इस्तेमाल करने, जबकि कुछ यहाँ शॉपिंग करने आते हैं. इन सभी लोगों के शरीर से ऊर्जा निकलती है और बेकार चली जाती है.
उन्होंने बताया कि इसी वजह से हमने इस ऊर्जा को वेंटिलेशन सिस्टम के जरिए इकट्ठा करने की योजना बनाई है. वैसे इस ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए आमतौर पर खिड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है.कार्ल ने कहा कि योजना यह है कि इस ऊर्जा का उपयोग पानी गर्म करने में किया जाए और उसे पास वाली एक बिल्डिंग में सप्लाई किया जाए. उन्होंने कहा कि 2010 में यहाँ बनकर तैयार होने वाले होटल और कुछ दुकानों को भी गर्म पानी की सप्लाई की जाएगी.
कार्ल के अनुसार यह पुरानी तकनीक है, लेकिन हम इसका इस्तेमाल नए तरीके से कर रहे हैं. फिलहाल कोई भी इस तकनीक के जरिए इस ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि इससे पानी गर्म करने की लागत में 20 फीसदी तक की कमी आएगी. ऊर्जा सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अपव्यय को लेकर सारी दुनिया में जो कुछ चल रहा है उसे देखते हुए यह एक सराहनीय प्रयास है.
रविवार, 6 जनवरी 2008
अंधेरे से उजाले की किरण
यह है सिडनी का प्रसिद्ध ओपेरा हाउस। रोशनी से जगमगाता (ऊपर) और अंधेरे में डूबा हुआ (नीचे)। ग्लोबल वार्मिग के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से शनिवार, 29 मार्च को आस्ट्रेलिया के इस सबसे महत्वपूर्ण शहर की सभी बत्तियां एक घंटे के लिए बुझा दी गई थीं। अंधकारमय भविष्य से दुनिया को आगाह करने के लिए अर्थ आवर कार्यक्रम के तहत 35 से ज्यादा देशों के लगभग 370 शहर शनिवार को एक घंटे के लिए अंधेरे में डूबे रहेंगे।
शनिवार, 5 जनवरी 2008
इंसान से बेहतर ओरांग उटान
एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि मनुष्य का सबसे करीबी जैविक साथी ओरांग उटान न सिर्फ मनुष्य की तरह हँस सकता है, बल्कि उसने हँसना मनुष्यों से पहले सीख लिया था और वे एक-दूसरे की नकल उतारने में माहिर होते हैं. अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया है कि हँसी मनुष्यों ने ईजाद नहीं की, बल्कि उनसे पहले ओरांग उटान ने हँसना सीख लिया था और वे एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति का प्रदर्शन भी करते थे. इतना ही नहीं उनमें एक-दूसरे की नकल करने की प्रवृत्ति भी मनुष्यों से पहले की है.
यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मरीना डेविला रोस के मुताबिक अब तक यही माना जाता रहा था कि हँसी और सहानुभूति सबसे पहले मनुष्यों के व्यवहार का अंग बनी, लेकिन यह प्रवृत्ति ओरांग उटान में मनुष्यों से भी पहले विकसित हो गई थी और वे इसका उपयोग भी भरपूर करते आए हैं. शोधकर्ताओं की टीम ने इस शोध के परिणामों का परीक्षण करने के लिए चार अलग-अलग देशों के प्राइमेट सेंटर पर ओरांग उटान के चेहरों के अलग-अलग भावों वाली तस्वीरों को 25 ओरांग उटान के एक ग्रुप को एक-एक कर दिखाया.
उन्होंने पाया कि जब एक ओरांग उटान को किसी दूसरे ओरांग उटान की खुले मुँह वाली तस्वीर दिखाई गई तो उसे देखकर वह भी वैसा ही चेहरा बनाने लगा. इसी तरह हँसते चेहरे वाली तस्वीर देखकर वह भी हँसने लगा. रोस कहते हैं कि यह शोध जानवरों में सहानुभूति के नए पक्ष को उजागर करता है. वे कहते हैं कि इसे इस तरह से भी व्यक्त किया जा सकता है कि ओरांग एटान सिर्फ मनुष्यों की तरह बोल नहीं सकते, बाकी काम जैसे हाव-भाव व्यक्त करना आदि वे मनुष्यों से बेहतर कर सकते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मरीना डेविला रोस के मुताबिक अब तक यही माना जाता रहा था कि हँसी और सहानुभूति सबसे पहले मनुष्यों के व्यवहार का अंग बनी, लेकिन यह प्रवृत्ति ओरांग उटान में मनुष्यों से भी पहले विकसित हो गई थी और वे इसका उपयोग भी भरपूर करते आए हैं. शोधकर्ताओं की टीम ने इस शोध के परिणामों का परीक्षण करने के लिए चार अलग-अलग देशों के प्राइमेट सेंटर पर ओरांग उटान के चेहरों के अलग-अलग भावों वाली तस्वीरों को 25 ओरांग उटान के एक ग्रुप को एक-एक कर दिखाया.
उन्होंने पाया कि जब एक ओरांग उटान को किसी दूसरे ओरांग उटान की खुले मुँह वाली तस्वीर दिखाई गई तो उसे देखकर वह भी वैसा ही चेहरा बनाने लगा. इसी तरह हँसते चेहरे वाली तस्वीर देखकर वह भी हँसने लगा. रोस कहते हैं कि यह शोध जानवरों में सहानुभूति के नए पक्ष को उजागर करता है. वे कहते हैं कि इसे इस तरह से भी व्यक्त किया जा सकता है कि ओरांग एटान सिर्फ मनुष्यों की तरह बोल नहीं सकते, बाकी काम जैसे हाव-भाव व्यक्त करना आदि वे मनुष्यों से बेहतर कर सकते हैं.
सदस्यता लें
संदेश
(
Atom
)