यह है सिडनी का प्रसिद्ध ओपेरा हाउस। रोशनी से जगमगाता (ऊपर) और अंधेरे में डूबा हुआ (नीचे)। ग्लोबल वार्मिग के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से शनिवार, 29 मार्च को आस्ट्रेलिया के इस सबसे महत्वपूर्ण शहर की सभी बत्तियां एक घंटे के लिए बुझा दी गई थीं। अंधकारमय भविष्य से दुनिया को आगाह करने के लिए अर्थ आवर कार्यक्रम के तहत 35 से ज्यादा देशों के लगभग 370 शहर शनिवार को एक घंटे के लिए अंधेरे में डूबे रहेंगे।
शनिवार, २९ मार्च २००८
अंधेरे से उजाले की किरण
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पर्यानाद
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निरीह प्राणियों की हत्या का विरोध क्यों नहीं?

क्या यह चित्र कुछ कहता है? यह कैनेडा के सेंट लारेंस की खाड़ी में शुक्रवार 28 मार्च को एक हार्प सील को मारता एक शिकारी है। जीवों के खिलाफ हिंसा के चलते ऐसे अनेक निरीह प्राणी असमय काल के गाल में समा रहे हैं. कैनेडा और जापान जैसे कुछ देशों में यह क्रूर धंधा धड़ल्ले से जारी है. इन देशों की सरकारें अपने काम को जायज ठहराती हैं.
दरअसल, कनाडा में हर साल व्यवसायिक उपयोग के लिए काफी बड़े स्तर पर सीलों का शिकार किया जाता है। तमाम विरोधों के बावजूद कनाडा सरकार इस पर प्रतिबंध लगाने को तैयार नहीं है। हालांकि उसने घोषणा की है कि इस साल सिर्फ दो लाख 75 हजार सीलों को मारा जाएगा, लेकिन मानवीय तरीके से?
अब यह तो कनाडा सरकार ही जाने कि किसी जीव की हत्या मानवीय ढंग से कैसे की जा सकती है, वह भी व्यवसाय के लिए. जीवों की इस क्रूरतापूर्ण तरीके से हत्या के खिलाफ विश्व समुदाय को आवाज उठाना होगी अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब अंतिम जीव की हत्या होगी और तब हम उस विनाश को नहीं पाएंगे जो प्रकृति हमें दंडित करने के लिए करेगी.
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पर्यानाद
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गुरुवार, १३ मार्च २००८
शहरीकरण का बोझ नहीं सह पाएगा धरती का पर्यावरण
हम जैसों के लिए ज्यादा चिंता : भारत जैसे विकासशील देशों के संदर्भ में यह चेतावनी कुछ ज्यादा ही गंभीर है। वजह यह कि वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के मुताबिक विकासशील देशों में शहरी आबादी साढ़े तीन फीसदी सालाना की दर से बढ़ रही है, जबकि विकसित देशों में यह दर एक फीसदी से भी कम है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक अगले 20 सालों में शहरों की आबादी जितनी बढ़ेगी, उसका 95 फीसदी बोझ विकासशील देशों पर ही पड़ेगा। यानी 2030 तक विकासशील देशों में दो अरब और लोग शहरों में रहने लगेंगे।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अगर शहरों पर बढ़ रहे बोझ और प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया गया तो एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों पर भविष्य में बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा काफी बढ़ जाएगा। दुनिया के ऐसे 21 बड़े शहरों में से 75 फीसदी विकासशील देशों में ही हैं। कुछ आंकड़ों के मुताबिक 2015 तक ऐसे 33 में से 27 शहर विकासशील देशों में होंगे।
बढ़ती संख्या, घटती सुविधाएं: शहरों पर ज्यों-ज्यों बोझ बढ़ रहा है, लोगों को मिलने वाली सुविधाएं घट रही हैं। बेहतर जिंदगी की चाह में लोग शहरों की ओर भागते हैं, लेकिन वास्तव में उन्हें मुसीबतें ही मिलती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विकासशील देशों में 70 फीसदी से ज्यादा [करीब 90 करोड़] आबादी झुग्गी-झोपड़ियों में रहती है। वर्ष 2020 तक यह संख्या दो अरब हो जाने का अनुमान है। ऐसे में जहां उनके लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ती हैं, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है।
प्रदूषण की कीमत: शहरों में विकास और बढ़ती जनसंख्या के चलते प्रदूषण भी खूब बढ़ रहा है। तेजी से विकास कर रहे चीन के खाते में दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 16 शहर हैं। प्रदूषण के चलते शहरों में हर साल करीब दस लाख लोग समय से पहले मर जाते हैं। इनमें ज्यादातर विकासशील देशों के ही होते हैं।
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पर्यानाद
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