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Friday, September 12, 2008

एक टी-शर्ट की धुलाई और पर्यावरण

पर्यावरण को सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचाने वाले तत्‍वो में ग्रीन हाउस गैसों का स्‍थान सबसे अव्‍वल है। आम घरों में इस्‍तेमाल होने वाली वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर भी इसके उत्‍सर्जन में अपना पूरा योगदान देते हैं। लेकिन इन वस्‍तुओं पर हमारी निर्भरता इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि इनके बिना जीवन की कोई कल्‍पना भी नहीं करना चाहता. पर्यावरण की रक्षा करने और ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍पादन में कटौती करने की वकालत करने वाले लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ऐसी जीवन शैली विकसित की जानी चाहिए जिससे पर्यावरण को हानि कम से कम पहुंचे।

क्‍या कभी आपने इस बात पर गौर किया है कि यदि हम गंदे कपड़ों को वाशिंग मशीन से धोने की जगह हाथों से धोएं, तो कहीं न कहीं ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने में अपना योगदान देते हैं। यानि हम प्रकारांतर से जलवायु परिवर्तन के खतरे के खिलाफ चल रही लड़ाई का एक हिस्‍सा बन जाते हैं। यानि मशीन की जगह हाथ से कपड़े धोने से ऊर्जा की बचत भी होती है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि एक गंदी टी-शर्ट को धोने में जितनी ऊर्जा लगती है, वह उसके निर्माण में लगी ऊर्जा की तीन-चौथाई होती है।

क्वींसलैंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सूती और पॉलिएस्टर टी-शर्ट्स के निर्माण, इनके इस्तेमाल और नष्ट होने के चरणों में पर्यावरण पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि समूचे जीवनकाल में एक टी शर्ट जितना कार्बन उत्पन्न करती है, उसमें से 75 फीसदी उसके मशीन में धुलने के कारण पैदा होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम अपने कपड़ों को मशीन से धोने की जगह हाथ से धोएं तो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी।

5 comments :

अजित वडनेरकर said...

बहुत दिनों बाद सुध ली आपने पर्यानाद की ....
बढ़िया है ....

भुवनेश शर्मा said...

आपने जो फरमाया उससे चिंता जरूर हुई पर हम जिस जीवनशैली को अपना चुके हैं और अब उसके बिना जीवन की कल्‍पना नहीं कर सकते तब ऐसे में क्‍या विकल्‍प शेष रह जाता है.

हालांकि मेरे घर में मशीन नहीं है...पर कपड़ों की धुलाई के वक्‍त जो साबुन बहकर नाली और अंतत: नदी में पहुंचता है वह भी तो हमारे पर्यावरण को जहरीला बना रहा है.....प्रकृति के संरक्षण के लिए एक व्‍यापक दृष्टिकोंण व समग्र प्रयासों से ही कुछ किया जा सकता है....इसके लिए सबसे जरूरी है पर्यावरण शिक्षा...आपका ब्‍लॉग भी इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
साधुवाद
कृपया यहां से वर्ड वेरीफिकेशन हटा दें

सागर नाहर said...

आपकी बात तो सही है ही पर भुवनेशजी की बात भी गौर करने लायक है।

Shastri said...

"समूचे जीवनकाल में एक टी शर्ट जितना कार्बन उत्पन्न करती है, उसमें से 75 फीसदी उसके मशीन में धुलने के कारण पैदा होता है।"

यह मेरे लिये एकदम नई जानकारी है. आभार!

कई महीनों से आपका (किसी का) चिट्ठा नहीं देख पा रहा था, लेकिन अब वापस आ गया हूँ

सस्नेह



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- समय पर प्रोत्साहन मिले तो मिट्टी का घरोंदा भी आसमान छू सकता है. कृपया रोज कम से कम 10 हिन्दी चिट्ठों पर टिप्पणी कर उनको प्रोत्साहित करें!! (सारथी: http://www.Sarathi.info)

मीनाक्षी said...

"समूचे जीवनकाल में एक टी शर्ट जितना कार्बन उत्पन्न करती है, उसमें से 75 फीसदी उसके मशीन में धुलने के कारण पैदा होता है।"
यह जानकारी तो हमारे लिए भी नई है. अपने देश में जाकर मेज़ पर बाल्टी रखकर हाथ से धोना या फर्श पर कपड़े रखकर पैर से धोने की मस्ती तो करते ही थे..लेकिन अब गम्भीरता से ऐसा करने की कोशिश करेगे..
आप इसी तरह से नई नई जानकारी लेकर आते रहिए...हममें कुछ तो चेतना जागेगी...

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