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Friday, December 28, 2007

पेड़-पौधे प्रदूषण रोकने में सहायक

जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीन संशोधित) पेड़-पौधे प्रदूषण रोकने में भी कारगर होते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे पौधों का इस्तेमाल जमीन में मौजूद इंडस्ट्रियल केमिकल और विस्फोटक जैसे प्रदूषक को बाहर निकालने के लिए किया जा सकता है.

खरगोश की जीन से युक्त छह इंच लंबे पॉपुलर के पौधे की जांच में प्रदूषक को बाहर निकलने की क्षमता पाई गई. इसकी जड़ों में केमिकल (ट्राइक्लोरोथिलीन) मिले पानी का इस्तेमाल करने पाया गया कि इसमें अधिकतम 91 फीसदी प्रदूषक तत्व सोखने की क्षमता है. इस केमिकल को जमीन में मौजूद पानी के प्रदूषण का बड़ा कारण माना जाता रहा है. जीएम पौधे ने आम पौधों के मुकाबले इस प्रदूषक को 100 गुणा ज्यादा तेजी से हानिरहित बाय-प्रॉडक्ट में तोड़ने में सफलता पाई.

जैव इंजीनियरिंग से रुका हाइवे पर भूस्खलन

पांच साल पहले तक नेपाल के हाइवे पर भूस्खलन का खतरा रहता था, लेकिन अब लोगों को इस सड़क से गुजरते हुए यह आशंका नहीं सताती. ऐसा मुमकिन हुआ है जैव इंजीनियरिंग के कमाल से. जैव इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग का मिलाजुला इस्तेमाल करके नेपाल में हाइवे को भूस्खलन से सुरक्षित बनाया गया है. सन् 2004 के बाद से यहां भूस्खलन की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है.

क्‍या किया: काठमांडू से 80 किलोमीटर दूर कृष्णबीर में जब भूस्खलन हुआ करते थे तो पृथ्वी हाइवे पर यात्रा करने वालों की जान पर बन आती थी. यह हाइवे समूचे नेपाल में रसद पहुंचाने के लिए लाइफलाइन का काम करता है. यहां जैव इंजीनियरिंग का उपयोग करते हुए बड़ी संख्या में घास, झाड़ी और पेड़ लगाए गए हैं. छोटे-छोटे बांधों को तैयार किया गया है. इसके अलावा दीवारों और नालों को इस तरह तैयार किया गया है कि पानी के तेज प्रवाह और मलबे से ज्यादा क्षति न हो सके.

कृष्णबीर में जैव इंजीनियरिंग से भूस्खलन से निपटने का अनोखा स्थायी रास्ता खोजा गया है. जैव इंजीनियरिंग कम लागत में भूस्खलन को रोकने के बेहतर उपाय उपलब्ध कराता है. खासकर इसका उपयोग पहाड़ी इलाकों में किया जा सकता है. सार यह कि प्रकृति से मित्रवत् रह कर ही इंसान सुरक्षित रह सकते हैं.

1 comment :

हर्षवर्धन said...

नए साल की शुभकामनाएं। कोशिश करेंगे प्रदूषण कुछ कम करने की।

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