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Wednesday, December 12, 2007

अगले पांच साल में बर्फ नहीं होगी आर्कटिक में

आर्कटिक महासागर वर्ष 2012 में बर्फ रहित हो जाएगा. नासा के एक जलवायु वैज्ञानिक जे ज्वाली ने यह आशंका जताई है. उनका कहना है कि जिस रफ्तार से आर्कटिक महासागर की बर्फ पिघल रही है, उसे देखते हुए इस बात की पूरी आशंका है कि 2012 तक वह बर्फ रहित हो जाएगा.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आंकड़ों के अनुसार ग्रीनलैंड की बर्फीली चादर पिछले आंकड़े की तुलना में करीब 19 अरब टन अधिक पिघल चुकी है. इस साल गर्मी में यहां की बर्फ चार साल पहले मौजूद बर्फ की तुलना में बिल्कुल आधी थी.

पिछले साल वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने आश्चर्य जताते हुए कहा था कि आर्कटिक के बर्फ पिघलने की गति को देखते हुए लगता है कि यह 2040 तक नदारद हो जाएगा. इसी सप्ताह नए आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद ज्वाली ने कहा कि इस गति से तो आर्कटिक महासागर वर्ष 2012 में ही बर्फ रहित हो सकता है.


कल अमेरिका में ये हुआ

अमेरिका के मध्य स्थित ओकलाहोमा शहर में तूफान के चलते में जहाँ सड़कें बर्फ की मोटी चादर के नीचे छिप गई हैं और यातायात व्यवस्था ठप हो गई है, वहीं 6,00,000 घरों और बाजारों की बिजली गुल हो गई है. तूफान के कारण हुए सड़क हादसों में 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले दिनों में भी जबरदस्त बर्फबारी होने और जमा देने वाली ठंड पड़ने की भविष्यवाणी की गई है. ओकलाहोमा और मिसौरी में आपात स्थिति की घोषणा कर दी गई है. इस जबर्दस्‍त तूफान के कारण सड़क हादसों में 15 लोगों की मौत हो चुकी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि चारों ओर से बर्फ के भार से पेड़ों की टहनियों के चटखकर गिरने की आवाज सुनाई पड़ रही है. राष्ट्रीय मौसम सेवा ने ओकलाहोमा मिसौरी, कनसास और नेब्रास्का में सड़कों पर पोस्टर लगाकर बर्फीला तूफान आने की चेतावनी दी है. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को सतर्क कर दिया गया है.

अब पर्यानाद्: यह केवल एक बानगी है. पर्यावरण से छेड़डाड़ और प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ने के इससे भी बद्तर परिणाम हमें झेलना होंगे. यह तो महज एक शुरूआत है.

3 comments :

महेंद्र मिश्रा said...

बहुत बढ़िया जानकारी देने के लिए धन्यवाद

मीनाक्षी said...

ऐसी जानकारी पढ़कर मन दहल जाता है कि आने वाली पीढ़ी को हम क्या देकर जाएँगे.

हर्षवर्धन said...

अब भी नहीं चेते तो, भारत में भी ऐसे ही दृश्य आम होंगे।

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