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Monday, December 3, 2007

तो आपका जन्‍म किस मौसम में हुआ?

वैज्ञानिकों को आपने शायद ही कभी ऐसी बातें करते सुना हो, लेकिन ये सच है कि सितारों से नहीं बल्कि इस बात से आपका व्यक्तित्व और स्वास्थ्य तय होता है कि आप किस मौसम में पैदा हुए हैं. संडे टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में यूरोप के एक शोधकर्ता दल की रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें पाया गया है कि भाग्य का पहिया सितारों से नहीं घूमता बल्कि यह जालिम मौसम का कमाल होता है, जो लोगों के व्यक्तित्व के विभिन्न पहुलओं को संचालित करता है.

शोध के अनुसार उत्तरी गोलार्द्ध में मई महीने में पैदा होने वाली महिलाएँ अधिक मनोवेगी व्यवहार करती हैं जबकि जिनका जन्म नवंबर में होता है वे अधिक बहिर्मुखी होती हैं. इसी प्रकार वसंत ऋतु में पैदा होने वाले पुरुष सर्दियों में पैदा हुए पुरुषों के मुकाबले अधिक दृढ़ विचारों के होते हैं. रिपोर्ट कहती है कि पतझड़ में पैदा होने वाले लोग शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय होते हैं और फुटबॉल जैसे खेल में कमाल दिखाते हैं जबकि वसंत ऋतु में पैदा होने वालों का रुझान शतरंज जैसे खेलों की ओर अधिक होता है. सितंबर और दिसंबर के बीच पैदा होने वाले लोग मानसिक रूप से अधिक आतंकित रहते हैं जबकि इस बात के ठोस सबूत हैं कि जाती सर्दी और आते वसंत में पैदा हुए लोग शिजोफ्रेनिया के अधिक शिकार होते हैं.

हार्टफोर्डशायर यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर रिचर्ड वाइजमैन के हवाले से दैनिक ने लिखा है यह एकदम से कुछ वैसा ही है जैसा आप मौसम के तापमान के संबंध में उम्मीद लगाते हैं. मौसम संबंधी कई सारे प्रभाव दोनों गोलार्द्ध में उलटे हो जाते हैं. एक अन्य शोधकर्ता तथा एबरदीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन ईगल कहते हैं किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को परिभाषित करने में मुख्य दोष आहार तथा पोषण में मौसमी उतार-चढ़ाव तथा सर्दियों में होने वाले संक्रमण का होता है. यहाँ आनुवंशिक तथा अन्य पर्यावरणीय कारण भी भूमिका अदा करते हैं. इसलिए मौसम की पैदाइश एक सहायक कारक है.

लोगों का भविष्य बताने वाले हालाँकि इन चीजों को नहीं मानते और वे इसी तथ्य से प्रभावित हैं कि किसी व्यक्ति विशेष का व्यक्तित्व सितारों से प्रभावित होता है. इसके तर्क में वे उन लाखों लोगों का उदाहरण देते हैं जो रोजाना अपना भविष्यफल देखते हैं. लेकिन शोधकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि इन प्रभावों के पीछे कुछ मूलभूत जैविकीय कारण जिम्मेदार हैं न कि सितारों या ग्रहों की गति.

स्वीडन की यूमेया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जयंती छोटाई के अनुसार गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर द्वारा पैदा किए गए संवेदनशील हार्मोन्स का स्तर इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चा किस मौसम में पैदा हुआ है और यही स्तर गर्भावस्था के समय से ही शिशु के व्यक्तित्व को आकार देना शुरू कर देता है.

प्रोफेसर छोटाई कहती हैं कि तापमान, संक्रमण, रौशनी, जीवनशैली में परिवर्तन तथा पोषण ये सभी चीजें मौसम पर निर्भर करती हैं और इसी से ऐसा समझा जाता है कि हार्मोन्स प्रभावित होते हैं. ये विभिन्नता हमारी सौर प्रणाली में आने वाले मौसमी बदलाव से समझी जा सकती हैं. उदाहरण के लिए सर्दियों में सूरज की रोशनी कम रहती है और तापमान में गिरावट आती है. ऐसे मौसम में विषाणुओं का संक्रमण अधिक फैलता है.

2 comments :

अनिल रघुराज said...

रूढ़ मान्याताओं को खारिज करनेवाले ऐसे लेख बहुत उपयोगी हैं। पढकर नई जानकारी मिली। धन्यवाद

Pratyaksha said...

रोचक !
और आपके ब्लॉग पर लिंडा का संगीत सूदिंग है ।

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